बचपन और जवानी के बीच की एक महत्वपूर्ण अवस्था है किशोरावस्था I ऐसे समय में बच्चों की मनोदशा कुछ उलझन भरी होती है I अभी बचपन गया नहीं जवानी भी नहीं आई I लोग कहते हैं बचपना मत करो I कभी कहते हैं कि बड़ी - बड़ी बातें मत करो I मन मस्तिष्क में विचारों,भावनाओं का आवेग होता है I इस उम्र में बच्चे स्वतंत्र रूप से जीना चाहते हैं, फैसले लेना चाहते हैं I पर अनुभवों की कमी के कारण सही फैसले न ले पाने के कारण बच्चे मानसिक रूप से परेशान रहते हैं I
किशोरावस्था मानव जीवन की एक महत्वपूर्ण अवस्था है I इस अवस्था में बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है I सर्वांगीण विकास के अंतर्गत शारीरिक मानसिक विकास आता है I इस समय बच्चों में सामाजिक और संज्ञानात्मक विकास भी तीव्र गति से होता है I विकास की गति इतनी तेज होती है जिसके कारण बच्चों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है I ऐसी दशा में यदि सही दिशा, सही निर्देश, सही मार्गदर्शन न मिले तो तो बच्चे गलत रास्ता अपना लेते हैं I जिससे उनका पूरा जीवन प्रभावित होता है I
अपने बच्चों को जीवन जीने का सही ढंग सिखाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर बात करना जरूरी है I ये जरूरी है माता पिता के लिए, शिक्षा संस्थानों के लिए, सामाजिक संस्थानों के लिए ताकि बच्चे सरल और सहज तरीके से जीवन मूल्यों को, नियमों को समझते हुए अपना और समाज का निर्माण कर सकें I
शारीरिक विकास
किशोरावस्था के दौरान बच्चों में शारीरिक विकास बहुत तेज होता है I बच्चों में यौन परिपक्वता, हार्मोन में परिवर्तन, अति ऊर्जा वान ऐसे अनेक लक्षण नजर आते हैं I इस अवस्था में उनके पोषण की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए l सुदृढ़ शारीरिक विकास के लिए संतुलित भोजन आवश्यक होता है I इस समय बच्चों को प्रोटीन और विटामिन समृद्ध भोजन देना चाहिए l
मानसिक विकास
किशोरावस्था में बच्चों का मस्तिष्क बहुत तेजी से विकसित होता है I सामाजिक व्यवस्था के अनुसार चल पाना उन्हें सरल नहीं लगता I इस अवस्था में बच्चे सभी बातों को बहुत ही गंभीरता से लेते हैं I किसी बात को आसानी से स्वीकार नहीं करते हैं I कुल मिलाकर किशोरावस्था में बच्चे बहुत ही जटिल हो जाते हैं I ऐसी स्थिति में उनके संतुलित व्यक्तित्व के विकास के लिए एक विशेष योजना के अनुसार कार्य करना चाहिए l
भावनात्मक विकास
किशोरावस्था में सभी बच्चे बहुत कोमल भावनाओं से ओतप्रोत होते हैं I ये भावनाएं अत्यंत प्रबल होती हैं l सकारात्मक ऊर्जा जीवन को सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है I सकारात्मक विचार विमर्श करने से बच्चों की शारीरिक मानसिक ऊर्जा का प्रयोग personality development और सामाजिक सुरक्षा, सामाजिक विकास आदि क्षेत्रों में किया जा सकता है l बच्चों को चुनौती पूर्ण कार्यों में शामिल किया जाना चाहिए जिससे उनकी शारीरिक मानसिक शक्तियों को नियंत्रित करके उनका व्यक्तित्व निखारा जा सके I
सारांश
बच्चे देश, समाज,परिवार के लिए एक विशेष महत्व रखते हैं I वे हमारे आने वाले कल के सामाजिक जीवन का आधार हैं I उनका जीवन सरल, सहज और समृद्ध हो-इस हेतु हमें सावधानी पूर्वक उनका पथ प्रदर्शन करना चाहिए I जिस प्रकार आने वाले समय के लिए हम धन संचय करते हैं उसी प्रकार बच्चों को भी सम्भालना होगा I
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