शिक्षक दिवस पर विशेष
आवश्यकता
इस बार लिखने का विशेष प्रयास किया है क्योंकि हर साल 5 सितंबर को सारे देश में बड़े ही उत्साह के साथ शिक्षक दिवस मनाया जाता है I सभी बच्चे सच्चे मन से अपने शिक्षक के प्रति जो सम्मान और प्रेम प्रकट करते हैं उसका वर्णन कर पाना थोड़ा मुश्किल है I
लेकिन हर साल जो शिक्षक दिवस मनाया जाता है उसकी ज़रूरत क्या है? तो इसका जवाब है- बहुत ज़रूरत है I
परिचय
5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ I आदरणीय राधाकृष्णन एक उत्कृष्ट कोटि के शिक्षक थे I एक श्रेष्ठ शिक्षाविद और एक महान दर्शनशास्त्री थे I वे भारत के प्रथम उपराष्ट्रपती तथा द्वितीय राष्ट्रपती थे I इन्हें देश के सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया है I एक रोचक बात यह है कि इन्हें 27 बार नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया गया पर भेदभाव तो हर जगह होता है 🥲l
अपने व्यक्तित्व और कृतित्व से आदरणीय सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने जो आदर्श स्थापित किया है ,जो मिसाल कायम की है उसी के फलस्वरुप आज उनके जन्मदिन को पूरे देश में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है I
शिक्षक का महत्व
किसी देश के लिए ,समाज के लिए शिक्षक का महत्व अकथनीय है I शिक्षक ही समाज निर्माण का आधार होता है I एक शिक्षक ही है जो बाल्यावस्था से लेकर प्रौढ़ अवस्था तक देश के नागरिकों को मार्गदर्शन करता है I गुरु सामाजिक मूल्यों के साथ साथ नैतिक मूल्यों का भंडार होते हैं और इन मूल्यों की ओर समय समय पर अपने छात्रों का ध्यान आकर्षित करते रहते हैं I इसलिए शिक्षक को देश का निर्माता कहा जाता है I
शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है?
आपके मन मे, मस्तिष्क में ये प्रश्न जरूर उठता होगा कि शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है?🤔मैं जब छोटी थी तब मेरे मन में भी यह प्रश्न कई बार उठा पर इसका सटीक जवाब अब जा
कर मिला है 🤠दरअसल यह परंपरा एक रोचक घटना के परिणाम स्वरूप चल पड़ी I हुआ यूं कि उन दिनों डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के राष्ट्रपति पद पर शोभायमान थे तब उनके कुछ भूतपूर्व छात्र उनसे मिलने आए I उन्होंने ही उनके जन्मदिन को मनाने की प्रार्थना की और डाक्टर जी ने उनका यह आग्रह स्वीकार कर लिया I
बस फिर क्या था!उसी साल से (1962) हर साल के 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा I ❤
कुछ बातें मेरी भी 🙏
हमारे देश में शिक्षक का स्थान इश्वर से भी ऊंचा माना गया है I इसकी पुष्टि हमारे शास्त्रों में होती है जहाँ लिखा गया है
"गुरू गोविंद दोउ खड़े काके लागू पाय,
बलिहारी गुरू आपने गोविंद दियो बताय l "
लेकिन वर्तमान परिदृश्य में भारत में गुरूओं के प्रति देश, समाज की धारणा बहुत बदल गई है I प्राचीन काल या पुराने समय में जो सम्मान शिक्षकों को मिलता था वो सम्मान अब नहीं मिलता I सम्मान में जो गिरावट आई है उसका जिम्मेदार बाज़ार वाद है I इसी के साथ
शिक्षक चयन प्रक्रिया में सरकारों की उदासीनता जिस कारण अयोग्य शिक्षकों का चयन हो जाता है I
कारण चाहे जो भी हो लेकिन अच्छे नागरिक, अच्छा समाज और संस्कृति संपन्न राष्ट्र के निर्माण के लिए ये जरूरी है कि समाज में शिक्षकों का सम्मान किया जाय I शिक्षक को भी अपने लिए मर्यादा, सीमा का निर्धारण करना चाहिए और अपने उत्तरदायित्वों का गंभीरता पूर्वक निर्वहन करना चाहिए l
निष्कर्ष
मैं पूरी निष्ठा से उन शिक्षकों को बधाई देती हूं जो पूरे मनोयोग से समाज के उत्थान में लगे हुए हैं I उनके उत्कृष्ट योगदान हेतु ससम्मान धन्यवाद देती हूं I आप सभी से करबद्ध निवेदन है कि अपने शिक्षकों का सम्मान करें I सम्मान के लिए केवल एक ही दिन क्यों?हमारी जिम्मेदारी भी बनती है कि हम शिक्षक और समाज के बीच, शिक्षक और छात्रों के बीच ऐसा वातावरण तैयार करें जिससे शिक्षा के उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सके I इस प्रकार हम अपना, समाज और देश का नाम ऊंचा कर सकते हैं और अपने पूर्वजों को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं I
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