Woman of india

 Introduction (परिचय)

भारतीय महिलाएँ अपनी शक्ति, सौंदर्य, सुचरित्र, मातृत्व, सहानुभूति, सहनशीलता, संघर्षशीलता आदि गुणों के लिए सम्पूर्ण विश्व में जानी जाती हैं I इस बात की पुष्टि न सिर्फ़ भारत के ब्लकि विश्व के अन्य देशों के विद्वान भी कर चुके हैं I कई अध्ययन इस बात को साबित कर सकते हैं I आज इसी विषय पर लिखने का मन बना है I तो चलिए कुछ और बातें करते हैं भारतीय महिलाओं की I 

Indian Women in Ancients India (प्राचीन काल में भारतीय  महिलाएं)

भारत की हर औरत ने समाज में उत्थान की चरम सीमा से लेकर पतन की गहरी खाइयों को देखा है I एक समय था जब भारत की नारी पुरुषों के बराबर थी I समाज में पुरूषों के बराबर अधिकार और सम्मान पाती थी I घर से लेकर रणभूमि तक अपनी उपस्थिति दर्ज कराती थी I ये समय था आरंभिक वैदिक युग का I हमारे देश में 5000 ईसा पूर्व से लेकर 500 ईसा पूर्व तक अनेक सभ्यताओं के उत्थान से पतन के साक्ष्य मिलते हैं I 500 ईसा पूर्व से पहले भारत में स्त्रियों की सामाजिक स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण थी I ईसा पूर्व 500 के बाद स्मृतियाँ लिखी जाने लगीं I जिसके कारण महिलाओं की सामाजिक स्थिति में गिरावट आने लगी I स्त्रियों के अस्तित्व को सबसे ज्यादा प्रभावित किया मनुस्मृति ने I 
मनुस्मृति के अनुसार  पति को खुश रखना ,उसकी सेवा करना यही प्रमुख कर्तव्य है एक स्त्री काl  सच्चे मन से की गई सेवा एक स्त्री को मोक्ष प्रदान करती है I धीरे धीरे उसे शिक्षा से भी दूर कर दिया गया I अब नारी समाज में सजावट का एक सामान बन कर रह गई l नारी को कोमल, नाज़ुक,  कमजोर साबित कर चाहरदीवारी में कैद कर दिया गया I 

Indian Women in middle Age (मध्य युगीन भारतीय महिलाएं)

ईसा की ग्यारहवीं सदी तक भारत में पश्चिम के धन, संपत्ति, सत्ता के लालची लोगों का आक्रमण शुरू हो गया I इसके पश्चात स्त्रियों के लिए समाज और अधिक कठोर और निर्मम हो गया I ये आक्रमण कारी धन के साथ साथ स्त्रियों को भी लूट ले जाते थे I इसी कारण सुरक्षा के नाम पर पर्दा प्रथा ,बाल विवाह प्रथा सती प्रथा और ऐसी ही अन्य कुप्रथाओं का प्रचार तेजी से हुआ I अब तक भारतीय समाज में जन्म लेना एक अभिशाप बन चुका था I मध्य युगीन भारत में मुहम्मद गोरी, दिल्ली सल्तनत  मुगल शासन और ब्रिटिश साम्राज्य आदि प्रमुख सत्ताधारी हुए I 
              अब तक देवदासी प्रथा  बाल विवाह, सती प्रथा, विधवा पुनः विवाह न करना,बेमेल विवाह आदि अनेक सामाजिक  बुराईयां समाज में अपनी गहरी पैठ बना चुकी थीं I पर  हमारी लाचार ,बेबस 
भारतीय नारी इन कुप्रथाओं को नियती मानकर इन बुराइयों के साथ जीना सीख चुकी थी I 

Women Of India In Modern Age (आधुनिक भारत की महिलाएं)

ईसा की ग्यारहवीं बारहवीं शताब्दी में इटली में पुनर्जागरण के अंकुर निकलने लगे थे I धीरे धीरे पुनर्जागरण रूपी पौधे की लताएँ पूरे यूरोप में फैल गईं I यूरोप में सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, वैज्ञानिक राजनीतिक उत्थान होने लगा I इस समय यूरोप के लगभग सभी शक्तिशाली देश भारत के संपर्क में थे I इसी कारण इस परिवर्तन का गहरा प्रभाव भारत पर पड़ा I वैसे तो सत्रहवीं शताब्दी तक यूरोप में भी महिलाओं की स्थिति कोई अच्छी नहीं थी I परन्तु पुनर्जागरण के प्रभाव से औरतों की सामाजिक स्थिति में सुधार आना शुरू हो गया था I स्पष्ट शब्दों में कहें तो भारतीय महिलाओं की तुलना में पश्चिम के देशों की महिलाओं की दशा अच्छी थी I 
                   अब इस दौरान जो लोग पाश्चात्य सभ्यता के संपर्क में आए 👉चाहे वह कोई छात्र 🧑‍💻हो, विद्वान 👩‍🎓हो, व्यापारी 🧑‍🍳हो, दूत हो- इन्होंने इस अन्तर को महसूस किया और भारतीय महिलाओं की दयनीय दशा की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित किया l ♥ इनमें प्रमुख थे राजा राम मोहन राय ,दयानन्द सरस्वती, स्वामी विवेकानंद ,ज्योतिबा फूले, केशव कर्वे और अनगिनत I इन समाज सुधारक नेताओं ने महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक समानता के लिए आजीवन संघर्ष किया I सावित्री बाई फूले के अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप स्वयं औरतों में आत्म निर्भरता तथा आत्म सम्मान की भावना जागृत हुई I 
                    समाज सेवकों के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप सती प्रथा बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं पर प्रतिबंध लगाकर ब्रिटिश सरकार ने गैर कानूनी करार दे दिया I आजादी के बाद भी इन कानूनों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता I लेकिन कानून से छुपाकर कुछ लोग इन घृणित प्रथाओं का पालन करते हैं I पर ये घटनायें अब ना के बराबर हैं I 

Women Of Modern India (आधुनिक भारत की महिलाएँ)

आज के भारत में हर महिला जागरूक 👧है I हर राज्य, हर जिला हर गांव में महिलाओं के लिए प्राथमिक शिक्षा और उच्च प्राथमिक शिक्षा की व्यवस्था की गयी है I हर महिला अपने अधिकारों के साथ ही अपने कर्तव्यों के प्रति भी सचेत रहती है I आज का युग संचार क्रांति का युग है I संचार माध्यमों ने महिला सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त किया है I आज हर क्षेत्र में, चाहे विज्ञान हो, चाहे राजनीति हो, चाहे कला हो या तकनीकी हो, घर से संसद तक हर जगह महिलाएँ अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं I 

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