बुद्ध पूर्णिमा
परिचय
गौतमबुद्ध भगवान विष्णु के 9 वें अवतार माने जाते हैं I 2585 वर्ष पूर्व वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा 🌝 को नेपाल के लुम्बिनी नामक स्थान पर इनका जन्म हुआ था I इस कारण आज यह स्थान यूनेस्को की विश्व विरासतों की सूची में शामिल किया गया है I बुद्ध के पिता इक्ष्वाकु कुल के राजा 👑 थे I उनका नाम शुद्दोधन था I माता का नाम महामाया था 👸I जब बुद्ध का जन्म हुआ था उनके तलवों में शंख का चिन्ह था I राजकुमार का नाम सिद्धार्थ रखा गया I पुरोहितों ने बताया कि यह बालक अत्यंत प्रतिभाशाली है I बड़ा होकर या तो यह चक्रवर्ती सम्राट 👑बनेगा या तो बहुत बड़ा विद्वान 🧑💻बनेगा I सन्यासी बन जाने की संभावना भी जतायी I बेटा सन्यासी न बन जाए इसलिए सारी सुख सुविधा महल के अंदर ही कर दी गई l लेकिन न तो महल की दीवारें न तो सुख सुविधाएं ना ही नव वैवाहिक जीवन ,👩👧👧कुछ भी सिद्धार्थ को सत्य की खोज करने से रोक नहीं पाए I
आधी रात में सब कुछ छोड़कर वे ज्ञान की प्राप्ति के लिए निकल गए I सात वर्षों तक भटकने के बाद वैशाख की पूर्णिमा को बिहार के 'गया ' नामक स्थान पर एक वृक्ष 🌳के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति होती है I इसके पश्चात वे आजीवन जनसामान्य के दुख दूर करने के रास्ते बताते हुए निर्वाण को प्राप्त हुए I
बुद्ध पूर्णिमा का महत्व
बुद्ध पूर्णिमा हिन्दुओं और बौद्धों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है I वैशाख मास की पूर्णिमा के दिन बुद्ध का जन्म हुआ I सत्य की खोज में निकले सिद्धार्थ को ज्ञान की प्राप्ति भी वैशाख मास की पूर्णिमा को हुई I अपने जीवन के मूल्यवान 80 वर्ष लोक कल्याण कार्य के पश्चात वैशाख मास की पूर्णिमा को ही भगवान बुद्ध को निर्वाण प्राप्त हुआ I हिन्दू धर्मावलंबी भगवान बुद्ध को भगवान विष्णु का 9 वां अवतार मानते हैं I इसी के साथ पूरे विश्व से लोग भगवान बुद्ध से जुड़े तीर्थ स्थलों की यात्रा के लिए इस दिन भारत आते हैं I
पूजा की विधि और मुहूर्त
इस बार बुद्ध पूर्णिमा 23 मई को है I इसी दिन 563 ईसा पूर्व गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था I मान्यता है कि इस दिन एक कलश को जल से भरकर रखना चाहिए l इस दिन किसी भी पवित्र नदी में स्नान करके अपनी क्षमता के अनुरूप दान करना चाहिए l इस दिन सत्यनारायण कथा सुनने सुनाने की भी परम्परा रही है I ऐसा माना जाता है कि वर्षों की तपस्या के बाद बुद्ध ने खीर का सेवन कर अपना व्रत तोड़ा था I इस लिए इस दिन खीर बनाना और उसका प्रसाद के रूप में वितरण करना-यह परंपरा युगों से चलीआ रही है I
22 मई को शाम पौने सात बजे से प्रारंभ होकर 23 मई को शाम साढ़े सात बजे तक बुद्ध पूर्णिमा का मुहूर्त रहेगा I सभी अनुशरण कर्ता भक्ति और आस्था के साथ भगवान बुद्ध की पूजाकरसकते हैंI
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