पुनर्जागरण (Renaissance)

 आज का विषय है पुनर्जागरण I अंग्रेज़ी में Renaissance के नाम से जाना जाता है I 'पुनर्जागरण' दो शब्दों के मेल से बना है-'pun' (फिर से)और 'जागरण' (जगाने या जागने की प्रक्रिया) जब कोई देश अपने पुराने आदर्श,संस्कृति, सभ्यता, धर्म, भाषा विचार आदि को तर्कों के आधार पर पुनः अपनाता है तो इसे पुनर्जागरण कहलाता है I पुनर्जागरण की प्रक्रिया पंद्रहवी शताब्दी तक काफी हद तक सम्पूर्ण विश्व में फैल चुकी थी लेकिन इसका केन्द्र यूरोप में स्थित था I                     यूरोप महाद्वीप पृथ्वी पर स्थित सात महाद्वीपो में से एक हैI   यूरोप महाद्वीप एशिया महाद्वीप से जुड़ा हुआ है इस कारण इन्हें यूरेएशिया खंड के नाम से जाना जाता है I यूरोप महाद्वीप में कुल मिलाकर 44 देश हैँ I इटली, जर्मनी, फ्रांस इंग्लैड पुनर्जागरण में        अग्रणी भूमिका निभाने वाले देश हैं I अवस्थिति और विस्तार की बात करें तो यूरोप यूरेएशिया खंड का पश्चिमी भाग है I                                     ईसा की दसवीं शताब्दी के अंत तक पुनर्जागरण के बीज़ बोये जा चुके थे I चर्च ने कहा कि मनुष्य को धरती पर जन्म दंड स्वरूप मिला है I इसलिए कम से कम उसे अपना अगला जन्म के     सुधार के लिए चर्च के आदेशों का पालन करना चाहिए l पुनर्जागरण से पूर्व लोग चर्च और धर्माधिकारियों की बात पर आंख मूँद कर विश्वास करते थे I लेकिन आगे चलकर धीरे धीरे हालात बदलने लगे I क्रांतिकारी विचारकों ने चर्च के आदेशों की सार्थकता पर खुलकर बात की और अपने लेखों के माध्यम से इन मुद्दों को साधारण जनमानस तक पहुँचाया I                                                                   सामाजिक असमानता, आर्थिक असमानता, गरीबी, अन्धविश्वास, बीमारी ऐसी ही अनेक समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए आतुर आम आदमी ने इन विचारों को गंभीरता से लिया और रूढ़िवाद के खिलाफ़ विरोध करना प्रारंभ कर दिया I ये विरोध आज भी जारी है I वर्तमान में समाज को जीवन यापन में जो सरलता होती है वह इसी तरह की कई क्रांतियों का परिणाम है I इतिहास में बहुत पीछे न जाकर सौ साल पहले की ही बात करें तो एक आम आदमी को जो यातनाएं सहनी पडी, आज का आम आदमी उन यातनाओं से बचा हुआ है I आज अपने अधिकारों के लिए एक इंसान आवाज उठा सकता है और अन्य लोग उसका समर्थन कर सकते हैं I जब कि पहले ऐसा नहीं था I                                                                                ईसा पूर्व की रोमन सभ्यता अत्यंत उत्कृष्ट उत्तम कोटि की सभ्यता थी I किन्तु विपरित परिस्थितियों के कारण ईसा की तीसरी- चौथी शताब्दी तक इस सभ्यता ने अपना सारा वैभव और तेज खो दिया I समय बीता,सामाजिक और राजनीतिक हालात बद से बदतर होते चले गए I बाहरी लोगों ने आकर अपना नियम, कानून यहाँ के लोगों पर थोपना शुरू कर दिया था I तर्कहीन कानूनों से त्रस्त लोगों ने अपने पुराने मूल्य, नियम और कानून व्यवस्था को लेकर चिंतन करना शुरू किया और उन्हें श्रेष्ठ पाया I                                                         परिणाम स्वरूप पुनर्जागरण का प्रारंभ हुआ I पुराने शास्त्रों और पांडुलिपियों को खोजा जाने लगा l उनका अनुवाद स्थानीय, सरल, सहज और प्रचलित भाषाओं में होने लगा I नई तकनीकों के विकास के साथ बड़े पैमाने पर लेखन सामग्री लोगों तक पहुंचने लगी I लोग जागरूक होने लगे I दुनिया में सकारात्मक बदलाव आने लगे आज हर  छोटे- बड़े मुद्दों पर चर्चा होती है और लोग बोलने की हिम्मत रखते हैं I                                                                     आज संचार माध्यम की बहुलता के कारण लोग बहुत तेजी से नए विचारों से अवगत हो रहे हैं और आवश्यकताओं के अनुसार इन विचारों को आत्मसात भी कर रहे हैं I ऐसा नहीं है कि पुनर्जागरण की प्रक्रिया समाप्त हो गई है, यह आज भी जारी है I 

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