Lollard movement

 परिचय 

वह समय था चौदहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध का I john Wyclef 
ने रूढ़िवादी विचारधारा को मानने से इंकार कर दिया था और सारे देश में लोगों को जागरूक किया कि बिना सोचे समझे धर्म के नाम पर कोई भी आदेश का पालन न करें, हम केवल उन बातों को मानें जो हमारे पवित्र धर्म ग्रंथ में लिखा गया है I पन्द्रहवीं-सोलहवीं शताब्दी में शुरू हुए धार्मिक सुधार आंदोलन का बीजारोपण चौदहवीं शताब्दी में ही  हो चुका था I 

Lollard  का  अर्थ तथा आविर्भाव

 इस शब्द का इस्तेमाल रोमन कैथोलक चर्च के अनुयायियों द्वारा धर्म सुधार के समर्थकों के खिलाफ अपमान जनक तथा हास्यास्पद तरीके से किया गया था I इस शब्द का आविर्भाव मध्य  डच भाषा के lollart से हुआ है जिसका अर्थ होता है बुदबुदाने वाला अर्थात धीमे व अस्पष्ट बोलने वाला अन्य तरीके से कहूं तो धर्म को न मानने वाला I 

आन्दोलन के कारण क्या थे?

तेरहवीं -चौदहवीं शताब्दी में पूरे यूरोप में चर्च तथा पोप का वर्चस्व बहुत अधिक बढ़ गया था I पोप ख़ुद को ईश्वर का प्रतिनिधि मानते थे I धार्मिक स्थलों पर अनैतिकता तथा भ्रष्टाचार फैला हुआ था I पोप तथा उसके अनुयायियों के आचरण पूर्णतः अशुद्ध हो चुके थे I पोप के द्वारा बनाए गए नियम कानून साधारण लोगों पर थोप दिए जाते थे I चर्च के कर्मचारी शारीरिक, आर्थिक, सामाजिक दृष्टि से भ्रष्ट हो चुके थे I john Wyclef  जैसे विद्वानों को समाज की ऐसी दुर्दशा बर्दाश्त नहीं होतीं थी I 

Lollard आंदोलन का परिणाम 

John Wyclef Oxford  University के एक महान दार्शनिक और धर्म शास्त्री थे I उनके नेतृत्व में चले आंदोलन में लोगों की संख्या भले ही कम रही हो लेकिन इस आंदोलन ने इंग्लैंड के धार्मिक सुधार के लिए एक वरदान साबित हुआ I कुछ विद्वान इसे प्रारम्भिक धर्म सुधार का प्रारंभ मानते हैं I इस आन्दोलन की प्रभावशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस आन्दोलन के अनुयायियों के द्वारा सुझाए गए मुद्दे ही आगे चलकर वास्तविक धर्म के शिखर की सीढ़ियां बने I 
                  यद्यपि इग्लैंड के राजा Henry 4th ने हिंसा के बल पर आन्दोलन तथा आंदोलनकारियों का दमन कर दिया फिर भी भूमिगत होकर कुछ लोग आन्दोलन का संचालन करते रहे और भविष्य में यही आन्दोलन प्रोटेस्टेंट विचार धारा के प्रचार प्रसार में सहायक सिद्ध हुआ I 

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