बाइबिल

बाइबिल क्या है?

बाइबिल एक धर्म ग्रंथ है I मूल रूप से यह ईसाईयों तथा यहूदियों का धर्म ग्रंथ है I वर्तमान समय में पूरी दुनियां में इस ग्रंथ का अनुकरण करने वाले लोगों की संख्या सर्वाधिक है I इस ग्रंथ मे ईश्वर के पुत्र ईसा मसीह के उपदेशों का संग्रह है I इसमें ईसा मसीह के जीवन के विषय में स्पष्ट रूप से लिखा गया है I 

बाइबिल कब लिखी गई?

बाइबिल का रचना काल लगभग सोलह सौ वर्षों का है I कई विचारक बारह सौ ईसा पूर्व से ईसा की प्रथम शताब्दी तक के समय को बाइबिल का रचना काल मानते हैं I कुछ का मानना है कि बाइबिल ईसा मसीह की मृत्यु के पश्चात उनके शिष्यों के द्वारा समय समय पर लिखी गयी है I कांस्टेटीन वॉन टीन्शनफोर्ड नामक व्यक्ति को कोडेक्स  सीनाटीकस नामक प्रति मिली जो बाइबिल की सबसे पुरानी प्रतियों में से एक है I 

'बाइबिल 'का अर्थ क्या है?

बाइबिल का शाब्दिक अर्थ होता है 'पुस्तक ' I  बाइबिल वैसे अंग्रेज़ी भाषा का शब्द है किन्तु यह रोमन के टा बिब्लियन  से निकला है जिसका अर्थ है किताबें I मूलतः य़ह कोइने ग्रीक भाषा है जिसका अर्थ होता है 'सामान्य' या साझा 'करना' I 
                        इस आधार पर बाइबिल का शाब्दिक अर्थ हम एक ⁰'ऐसी पुस्तक जो सबके लिए हो ' के रूप में लगा सकते हैं I 

बाइबिल की भाषा कौन सी है?

बाइबिल की रचना मूल रूप से तीन भाषाओं में की गई है I सबसे पहले ईसा मसीह के शिष्य मूसा ने हिब्रू भाषा में लिखा I उसके पश्चात्‌ आरामईक,लातीन, ग्रीक आदि भाषाओं में भी बाइबिल को लिखा गया है I ऐसा माना जाता है कि आरामईक ईसा मसीह की मातृ  भाषा थी I बाइबिल में वर्णित नया नियम ग्रीक भाषा में लिखा गया है I जेरोमी ने ईसा की चौथी शताब्दी में लैटिन में बाइबिल का अनुवाद किया था I अब तक सात सौ से भी अधिक भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है I 

बाइबिल आवश्यक क्यों है?

जब मनुष्य इस धरती पर जन्म लेता है तभी से उसे अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे भूख, प्यास, दर्द, लालच, क्रोध  अपमान, इर्ष्या,सुख, दुख,महत्वकांक्षा और भी कई भावनाओं से घिरा हुआ रहता है I इन हालातों से खुद को उबारने के लिए बाइबिल की आवश्यकता होती है I मनुष्य लालच में आकर पाप ना करे इस लिए बाइबिल की आवश्यकता होती है I 
                     मनुष्य का ईश्वर से मिलन कराने के लिए बाइबिल की आवश्यकता होती है I बाइबिल ने हमेशा से शक्तिशाली लोगों से कमजोर लोगों को बचाया है I बाइबिल हर मनुष्य को समान अधिकार देती है I 

निश्कर्ष 

बाइबिल की शिक्षा के प्रचार प्रसार के कारण आज पूरी दुनिया में क्रांतियाँ हुईं और तानाशाही व्यवस्था के स्थान पर लोकशाही व्यवस्था की स्थापना हुई है I जब मानव सत्य के मार्ग से भटक जाता है तब बाइबिल की सहायता से वह जीवन में सही रास्ते की खोज कर पाता है I 

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