महर्षि वाल्मीकि परिचय महर्षि वाल्मीकि को जगत विख्यात महाकाव्य रामायण के रचयिता के रूप में जाना जाता है I कई हजार वर्ष पूर्व रचित रामायण में समय, स्थान आदि के बारे में जो सटीक वर्णन किया गया है उसे देखकर लोग आश्चर्यचकित रह जाते हैं कि आज जब तकनीकी के इस युग में भी किसी वस्तु विशेष के बारे में सटीक जानकारी प्राप्त कर पाना मुश्किल हो जाता है तो इतने पुराने समय में समय, स्थान और घटनाक्रमों के बीच तारतम्य स्थापित कैसे किया गया होगा l जन्म और प्रारंभिक जीवन महर्षि वाल्मीकि के जन्म के बारे में कोई प्रामाणिक जानकारी नहीं मिलती l उपनिषदों में बस इतना ही वर्णन किया गया है कि ऋषि कश्यप और देवी अदिति की नौवीं संतान वरुण से महर्षि वाल्मीकि का जन्म हुआ था l एक किंवदन्ती यह भी है कि वाल्मीकि का असली नाम रत्नाकर था और वह एक जंगल में रहते थे l जंगल के रास्ते जो कोई जाता था उसे लूट लेते थे l ईश्वर की ईच्छा के अनुरूप मुनि नारदजी उस रास्ते से गुज़रे l हमेशा की तरह रत्नाकर ने हमला कर ...
आवश्यकता इस बार लिखने का विशेष प्रयास किया है क्योंकि हर साल 5 सितंबर को सारे देश में बड़े ही उत्साह के साथ शिक्षक दिवस मनाया जाता है I सभी बच्चे सच्चे मन से अपने शिक्षक के प्रति जो सम्मान और प्रेम प्रकट करते हैं उसका वर्णन कर पाना थोड़ा मुश्किल है I लेकिन हर साल जो शिक्षक दिवस मनाया जाता है उसकी ज़रूरत क्या है? तो इसका जवाब है- बहुत ज़रूरत है I परिचय 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ I आदरणीय राधाकृष्णन एक उत्कृष्ट कोटि के शिक्षक थे I एक श्रेष्ठ शिक्षाविद और एक महान दर्शनशास्त्री थे I वे भारत के प्रथम उपराष्ट्रपती तथा द्वितीय राष्ट्रपती थे ...
परिचय काजी नजरूल इस्लाम 🙏एक ऐसा प्रतिभाशाली व्यक्ति जो एक नहीं अनेक गुणों का स्वामी था I जन्म एक ऐसे समय में हुआ जब देश में आज़ादी की जंग रूपी फसल अंकुरित हो रही थी I पिता एक इमाम और माता एक कुशल गृहणी I माता पिता ने गरीबी के बावजूद इनके पालन पोषण में अपना सर्वोत्तम प्रयास किया I संवेदनशीलता के कारण छोटी सी उम्र में परिवार का सहारा बन गए I जैसे जैसे उम्र बढ़ी वैसे ही वैस जिम्मेदारियां भी बढ़ती चली गईं I देश की आज़ादी के लिए संघर्ष करना भी उन्हीं जिम्मेदारियों में से एक थी I जन्म 24 मई 1899 को ब्रिटिश कालीन भारत, अविभाजित बंगाल के चूरूलिया में एक ब्रिटिश विद्रोही ने बालक के रूप में जन्म लिया I माता पिता ने नाम रखा काज़ी नजरूल I पिता का नाम काज़ी फकीर अहमद था I माता का नाम जाहिदा खातून था I गरीबी के कारण जीवन यापन कठिनाई से हो पाता था I परिवार में धन की कमी थी पर आत्मसम्मान, दरियादिली और ईमान की नहीं l पत्नी और बच्चे पत्नी का नाम प्रमिला देवी था I बच्चे काज़ी सव्यसाची, काज़ी अनिरुद्ध ,कृष्णा मोहम्मद, अरिंदम खालिद I एक पोता काज़ी फकीर अहमद औ...
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