संदेश

जुलाई, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

किशोरावस्था और हमारे बच्चे (Teenage And Our Children)

 बचपन और जवानी के बीच की एक महत्वपूर्ण अवस्था है किशोरावस्था I ऐसे समय में बच्चों की मनोदशा कुछ उलझन भरी होती है I अभी बचपन गया नहीं जवानी भी नहीं आई I लोग कहते हैं बचपना मत करो I कभी कहते हैं कि बड़ी - बड़ी बातें मत करो I मन मस्तिष्क में विचारों,भावनाओं का आवेग होता है I इस उम्र में बच्चे स्वतंत्र रूप से जीना चाहते हैं, फैसले लेना चाहते हैं I पर अनुभवों की कमी के कारण सही फैसले न ले पाने के कारण बच्चे मानसिक रूप से परेशान रहते हैं I                 किशोरावस्था मानव जीवन की एक महत्वपूर्ण अवस्था है I इस अवस्था में बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है I सर्वांगीण विकास के अंतर्गत शारीरिक मानसिक विकास आता है I इस समय बच्चों में सामाजिक और संज्ञानात्मक विकास भी  तीव्र गति से होता है I विकास की गति इतनी तेज होती है जिसके कारण बच्चों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है I ऐसी दशा में यदि सही दिशा, सही निर्देश, सही मार्गदर्शन न मिले तो तो बच्चे गलत रास्ता अपना लेते हैं I जिससे उनका पूरा जीवन प्रभावित होता है I          ...

बाल्यावस्था और हमारे बच्चे (childhood And Our Children)

                         एक नजर आज हम ऐसे समय में जी रहे हैं जब संचार माध्यमों के जरिये ज्ञान का विस्फोट सा हुआ है I पुराने समय में जो जानकारी बच्चों को बाल्यावस्था में होती थी उससे अधिक जानकारी अब शैशवावस्था में हो जाती है I इसका स्पष्ट कारण तकनीकी विज्ञान का अकल्पनीय विस्तार है I तकनीकी ने सामाजिक विकास के हर क्षेत्र में अपना अतुलनीय योगदान दिया है I मानव जीवन के हर पहलू में तकनीकी विज्ञान ने हस्तक्षेप कर रखा है I आर्थिक, सामाजिक ,सांस्कृतिक, राजनीतिक, मानसिक हर पहलू में इसका प्रभाव है I             तकनीकी विकास के इस दौर में धाराप्रवाह होना एक बहुत बड़ी चुनौती है I इसने सामाजिक विकास को जितना सरल बनाया है  सामाजिक जीवन उतना ही जटिल बन गया है और हमारे बच्चों को आए दिन नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है I इसलिए आज बात करते हैं बाल्यावस्था और वर्तमान परिदृश्य के बारे में I              बाल्यावस्था जीवन का एक ऐसा समय है जब एक बालक दुनिया, समाज, परिव...