किशोरावस्था और हमारे बच्चे (Teenage And Our Children)
बचपन और जवानी के बीच की एक महत्वपूर्ण अवस्था है किशोरावस्था I ऐसे समय में बच्चों की मनोदशा कुछ उलझन भरी होती है I अभी बचपन गया नहीं जवानी भी नहीं आई I लोग कहते हैं बचपना मत करो I कभी कहते हैं कि बड़ी - बड़ी बातें मत करो I मन मस्तिष्क में विचारों,भावनाओं का आवेग होता है I इस उम्र में बच्चे स्वतंत्र रूप से जीना चाहते हैं, फैसले लेना चाहते हैं I पर अनुभवों की कमी के कारण सही फैसले न ले पाने के कारण बच्चे मानसिक रूप से परेशान रहते हैं I किशोरावस्था मानव जीवन की एक महत्वपूर्ण अवस्था है I इस अवस्था में बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है I सर्वांगीण विकास के अंतर्गत शारीरिक मानसिक विकास आता है I इस समय बच्चों में सामाजिक और संज्ञानात्मक विकास भी तीव्र गति से होता है I विकास की गति इतनी तेज होती है जिसके कारण बच्चों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है I ऐसी दशा में यदि सही दिशा, सही निर्देश, सही मार्गदर्शन न मिले तो तो बच्चे गलत रास्ता अपना लेते हैं I जिससे उनका पूरा जीवन प्रभावित होता है I ...